Women turning every challenge into an opportunity
Women Empowering Stories: Every year, some names emerge who are recognized not only for their success but also for the impact of their work. The year 2025 was a similar year, where women in various fields not only made their mark but also demonstrated that no path is difficult if one moves forward with continuous hard work, clear thinking, and confidence. The 30 women featured in this issue are not limited to any one field. Some are involved in the creative world, some are working towards social change, while others are setting new standards in their profession. Their achievements do not stop at awards or headlines, but are reflected in their efforts to improve everyday life.
An example of fearless leadership
Imagine a warrior whose voice resonates with the nation’s strength, and in 2025, that voice spreads across the world through Operation Sindoor. On May 7th, Colonel Sophia Qureshi
led a media briefing with Foreign Secretary Vikram Misri and Wing Commander Vyomika Singh, where she shared details of strikes on nine terror infrastructure sites in Pakistan and PoK. This operation
was a response to the April 22 Pahalgam attack, in which 26 civilians were killed. Sophia’s role symbolized the growing power of women in the military. Sophia was born in 1981 in Vadodara, Gujarat, where military tradition is deeply ingrained in her family. Both her grandfather and husband are in the army. Her achievements are inspiring. In 2016, she became the first female commander of the Force 18 multinational military exercise. She led peacekeeping and humanitarian mine action.
Colonel Sophia Qureshi
lioness of the sky
Imagine a warrior soaring in the sky, whose flight tells the story of national security. In 2025, that flight made headlines through Operation Sindoor. Wing Commander Vyomika Singh co-led a media briefing with Colonel Sophia Qureshi on May 7th, where they detailed strikes on nine terror bases in Pakistan and PoK. This operation was a response to the Pahalgam attack, and Vyomika’s role
demonstrates the growing strength of women in the Air Force.
Vyomika was born in New Delhi on May 10, 1990, and her name means “dweller in the sky.” The first in her family to serve in the military, she dreamed of becoming a pilot since childhood. Her family supported this passion. She was an NCC member in school and
earned an engineering degree, which laid the foundation for her technical skills. By profession, she is a helicopter pilot in the Indian Air Force, flying the Chetak and Cheetah. She received a permanent commission in the flying branch in 2019.
Wing Commander Vyomika Singh
The power of captaincy

भारतीय महिला क्रिकेट की बात हो और हरमनप्रीत कौर का नाम न आए, ऐसा संभव नहीं है। वह सिर्फ एक शानदार ऑलराउंडर ही नहीं, बल्कि भारतीय महिला क्रिकेट टीम की कप्तान
और करोड़ों लड़कियों की प्रेरणा भी हैं। वह महिला विश्वकप जीतने वाली दुनिया की सबसे अधिक उम्र की कप्तान बन गई हैं। उनकी कप्तानी में भारतीय महिला क्रिकेट टीम ने पहली बार वर्ल्ड कप जीता। उनका सफर बताता है कि जब एक लड़की अपने सपनों पर भरोसा करती है, तो वह न सिर्फ खुद आगे बढ़ती है, बल्कि दूसरों के लिए भी रास्ता बनाती है। हरमनप्रीत कौर का जन्म 8 मार्च 1989 को पंजाब के मोगा जिले में हुआ। उनके पिता हरमनजीत सिंह खुद वॉलीबॉल और बास्केटबॉल खिलाड़ी रहे हैं। खेल का माहौल उन्हें घर से ही मिला। लेकिन क्रिकेट को करियर के रूप में चुनना आसान नहीं था। छोटे शहर से निकलकर राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुंचने के लिए उन्हें कई मुश्किलों का सामना करना पड़ा।
हरमनप्रीत कौर
अभिनय की महारानी

सपनों की दुनिया में एक ऐसी अभिनेत्री की कल्पना कीजिए, जिसकी आंखें कहानियां कहती हैं और 2025 में उन आंखों ने राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार जीतकर इतिहास रच दिया। ‘मिसेज चटर्जी वर्सेज नॉर्वे’ में अपनी दमदार परफॉर्मंेस के लिए रानी मुखर्जी को बेस्ट एक्ट्रेस का 71वां नेशनल अवॉर्ड मिला, जो उनका पहला नेशनल अवॉर्ड है। 23 सितंबर को यह सम्मान मिला, जहां उन्होंने एक मां की लड़ाई को इतनी जीवंतता से पर्दे पर उतारा कि हर कोई तालियां बजाने पर मजबूर हो गया। यह फिल्म एक सच्ची घटना पर आधारित है और रानी की एक्टिंग ने इसे अमर कर दिया। रानी का जन्म 21 मार्च 1978 को मुंबई में हुआ, जहां बॉलीवुड का जादू उनके खून में था। पिता राम मुखर्जी फिल्म डायरेक्टर और फिल्मालया स्टूडियो के को-फाउंडर थे और मां कृष्णा मुखर्जी
प्लेबैक सिंगर हैं। यशराज राज की बहू और आदित्य चोपड़ा की पत्नी होने बावजूद
उन्होंने काम करना कभी नहीं छोड़ा।
रानी मुखर्जी
शब्दों की बुलंद आवाज

कल्पना कीजिए एक ऐसी लेखिका की, जिसकी कहानियां दिलों में दीपक जलाती हैं और 2025 में उस दीपक ने पूरी दुनिया को रोशन कर दिया जब उनकी किताब ‘हार्ट लैंप’ ने इंटरनेशनल बुकर प्राइज जीता। यह पुरस्कार पहली बार किसी कन्नड़ भाषा की किताब को मिला और वह भी एक शॉर्ट स्टोरी कलेक्शन को। दीपा भास्ती द्वारा अनुवादित यह संग्रह 1990 से 2023 तक की 12 कहानियों का खजाना है, जो महिलाओं के संघर्ष, जाति के अन्याय और धार्मिक भेदभाव की गहराई छूता है। लंदन में 20 मई को यह ऐलान हुआ और बानू मुश्ताक का नाम इतिहास में दर्ज हो गया। बानू मुश्ताक का सफर कर्नाटक के हासन जिले के एक छोटे से गांव से शुरू हुआ, जहां 3 अप्रैल 1948 को उनका जन्म हुआ। मुस्लिम परिवार में पली-बढ़ीं, उन्होंने जीवन की कठिनाइयों को करीब से देखा। उनकी शादी मोहियुद्दीन मुश्ताक से हुई, जो एक व्यवसायी हैं। परिवार की जिम्मेदारियां निभाते हुए उन्होंने कभी हार नहीं मानी।
बानू मुश्ताक
शतरंज में रचा इतिहास

भारतीय शतरंज में हर कुछ सालों में कोई ऐसा नाम आता है जो खेल की दुनिया में अपनी कड़ी मेहनत, आत्मविश्वास और रणनीति से नई मिसाल कायम करता है। 9 दिसंबर 2005 को नागपुर में जन्मी दिव्या देशमुख ऐसे ही युवा सितारों में से एक हैं। कम उम्र में ही उन्होंने न सिर्फ भारत का नाम रोशन किया, बल्कि यह भी साबित किया कि सपनों को मेहनत और समर्पण के साथ
सच किया जा सकता है। दिव्या ने विमेंस चेस वर्ल्ड कप 2025 जीतकर ग्रैंडमास्टर का खिताब हासिल किया और विमेंस कैंडिडेट्स टूर्नामेंट 2026 में खेलने का मौका पाया। इसके अलावा, उन्होंने
एशियाई चैंपियनशिप, वर्ल्ड जूनियर चैम्पियनशिप और वर्ल्ड यूथ चैम्पियनशिप में गोल्ड मेडल जीतकर यह दिखा दिया कि उनका खेल केवल प्रतिभा नहीं, बल्कि असाधारण तैयारी और मानसिक मजबूती का परिणाम है। दिव्या का जन्म एक मराठी परिवार में हुआ। उनके माता-पिता,
नम्रता और जितेंद्र देशमुख, दोनों डॉक्टर हैं। स्कूली पढ़ाई के दौरान उनका शतरंज के प्रति लगाव बढ़ा।
दिव्या देशमुख
प्रकृति की प्रहरी

डॉ. पूर्णिमा देवी बर्मन वन्यजीव जीवविज्ञानी और संरक्षणवादी हैं। उन्हें हाल ही में टाइम मैगजीन ने ‘वूमन ऑफ द ईयर’ 2025 की सूची में शामिल किया है। वह इस मैगजीन में शामिल होने वाली दुनियाभर की 13 महिलाओं में से एक हैं। पूर्णिमा देवी का जन्म असम के कामरूप क्षेत्र में हुआ।
उन्होंने नामकरण जीव विज्ञान में विशेषज्ञता के साथ लोकशास्त्र में मास्टर डिग्री हासिल की। बचपन से ही उन्हें प्रकृति से गहरा प्रेम रहा है। जब वह छोटी थीं तब उनकी दादी अक्सर उन्हें पक्षियों और जैव विविधता के बारे में शिक्षा देती थीं, जो वन्यजीव से उनके खास लगाव का कारण बना। उन्होंने हरगिला सेना की स्थापना की है जो लुप्त होते हरगिला पक्षी के संरक्षण के लिए कार्यरत है। हरगिला सेना की स्थापना के पीछे उनका उद्देश्य है स्थानीय महिलाओं को इस पक्षी के संरक्षण के लिए जागरूक करना। उन्हें फरवरी 2025 में टाइम पत्रिका की ‘वूमेन ऑफ द ईयर 2025’ सूची में शामिल किया गया।
डॉ. पूर्णिमा देवी बर्मन
सामाजिक बदलाव की सूत्रधार

जब भारत में कॉर्पोरेट सफलता की बात होती है, तो अक्सर बड़े नाम और बड़ी कंपनियां याद आती हैं। लेकिन जब बात समाज को लौटाने की हो, तो रोहिणी निलेकणी का नाम बेहद सम्मान के साथ लिया जाता है। वे न सिर्फ एक लेखिका और परोपकारी हैं, बल्कि ऐसी सोच की प्रतिनिधि भी हैं जो
कहती है- ‘समाज की समस्याओं का हल समाज के भीतर से ही निकलेगा।’ इन्होंने 2025 में 204 करोड़ का दान दिया, जिसके कारण वह ‘एडलगिव हुरून इंडिया फिलैंथ्रोपी लिस्ट 2025’ के अनुसार भारत की सबसे उदार महिला दानदाता बनीं और यह राशि शिक्षा, महिला सशक्तिकरण और पर्यावरण संरक्षण जैसे क्षेत्रों में लगाई गई। इंफोसिस के सह-संस्थापक नंदन निलेकणी की पत्नी होने के बावजूद, रोहिणी निलेकणी ने अपनी एक अलग पहचान बनाई है।
इनका जन्म 1959 में मुंबई में हुआ। उन्होंने अपनी शुरुआती पढ़ाई मुंबई में की और बाद में एल्फिंस्टन कॉलेज से स्नातक की पढ़ाई पूरी की।
रोहिणी निलेकणी
लोकसुरों की रानी

जब भी भारतीय लोक संगीत और शास्त्रीय सुरों की बात होती है, तो मैथिली ठाकुर का नाम अपने-आप जुबान पर आ जाता है। कम उम्र में ही अपनी मधुर आवाज, सादगी और गहरी संगीत साधना से उन्होंने देश-विदेश में लाखों दिल जीते हैं। मैथिली की नवीनतम और सबसे बड़ी उपलब्धि बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में अलीनगर सीट से जीत हासिल कर बिहार की सबसे कम उम्र की विधायक बनना है। अभी वह केवल 25 साल की हैं। उनका जन्म बिहार के एक संगीत-प्रेमी परिवार में हुआ। उनके पिता स्वयं संगीत से जुड़े रहे हैं, इसलिए घर में बचपन से ही सुर-ताल का वातावरण था। बहुत छोटी उम्र में ही मैथिली ने गाना शुरू कर दिया था। उन्होंने शास्त्रीय संगीत की विधिवत शिक्षा ली और साथ ही लोक संगीत को भी उतनी ही गंभीरता से सीखा। उन्हें व्यापक पहचान एक लोकप्रिय टीवी रियलिटी शो से मिली, लेकिन मैथिली की असली पहचान उनकी निरंतर मेहनत और साधना है।
मैथिली ठाकुर
हार सीखने का मौका

जरूरी नहीं जीवन में हर किसी को पहले प्रयास में ही सफलता का स्वाद चखने को मिल जाए। कई बार असफलता के बाद ही सफलता के रास्ते खुलते हैं। ऐसा ही हुआ मीनू मार्गरेट के साथ, जो ‘ब्लिसक्लब’ एक्टिववियर ब्रांड की फाउंडर हैं। ब्लिसक्लब को लॉन्च करने से पहले वह अपने दो स्टार्टअप में बुरी तरह फेल हुईं। बावजूद इसके मीनू ने हार नहीं मानी। मीनू का जन्म 18 जून 1994 को हैदराबाद में हुआ। क्राइस्ट कॉलेज से ग्रेजुएशन करने के बाद उन्होंने हैदराबाद में इंटरनेशनल स्कूल ऑफ बिजनेस से एमबीए की डिग्री हासिल की। बचपन से ही खेल में दिलचस्पी रखने वाली
मीनू को एवेंडस वेल्थ- हुरुन इंडिया यू 35 लिस्ट 2025 में 35 साल या उससे कम उम्र के 155 युवा लीडर्स को शामिल किया गया है। यह उनके जीवन में इसलिए सबसे खास जगह रखती है क्योंकि वह इस लिस्ट में शामिल होने वाली सबसे कम उम्र की महिला हैं। साल 2020 में ब्लिसक्लब से पहले उन्होंने दो स्टार्टअप शुरू किए थे जो असफल रहे, लेकिन आर्थिक नुकसान झेलने के बाद भी उन्होंने हार नहीं मानी।
मीनू मार्गरेट
समद्री संरक्षण की प्रेरणा

दिव्या कर्नाड भारतीय समुद्री संरक्षणवादी (मरीन कंजर्वेशनिस्ट) और शोधकर्ता हैं। भारत के कोरोमंडल तट पर पली-बढ़ीं दिव्या को यहीं से समुद्री संरक्षण की प्रेरणा मिली। अपनी पढ़ाई के दौरान, दिव्या की समुद्री इकोलॉजी में दिलचस्पी बढ़ी। मुख्य रूप से वह समुद्री संरक्षण और सामाजिक विज्ञान पर काम करती हैं, जिसमें शार्क और रे का संरक्षण, मत्स्य पालन प्रबंधन और स्थायी समुद्री भोजन शामिल है। फिलहाल दिव्या अशोक यूनिवर्सिटी में एनवायर्नमेंटल स्टडीज की असिस्टेंट प्रोफेसर हैं। उन्होंने रुत्गर्स यूनिवर्सिटी से जियोग्राफी में पीएच.डी की है। इसके साथ ही उन्होंने नेशनल सेंटर फॉर बायोलॉजिकल साइंसेज और सेंटर फॉर वाइल्डलाइफ स्टडीज के पोस्ट ग्रेजुएट प्रोग्राम से वाइल्डलाइफ बायोलॉजी और कंजर्वेशन में मास्टर्स किया है। समुद्री संरक्षण के लिए उन्हें 2017 में प्रतिष्ठित ग्लोबल फ्यूचर फॉर नेचर अवार्ड और 2020 में वाइल्डएज हीरो
अवार्ड से सम्मानित किया गया।
डॉ. दिव्या कर्नाड
विकास की राह दिखाती

अमृता कृष्णमूर्ति ऑटिज्म स्पेक्ट्रम डिसऑर्डर और अन्य विकासात्मक अक्षमताओं से प्रभावित बच्चों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने के क्षेत्र में एक अत्यंत प्रसिद्ध और सम्मानित विशेषज्ञ हैं। वर्षों के गहन अनुभव और वैज्ञानिक दृष्टिकोण के प्रति अटूट प्रतिबद्धता ने उन्हें इस क्षेत्र में एक अग्रणी आवाज बना दिया है। उनके उल्लेखनीय योगदान को अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भी सराहा गया है, जिसकी पुष्टि उन्हें हाल ही में यूनाइटेड किंगडम में ‘अनलॉक हर फ्यूचर प्राइज 2025’ से सम्मानित किए जाने से होती है। यह पुरस्कार न केवल अमृता कृष्णमूर्ति की व्यक्तिगत उत्कृष्टता को दर्शाता है, बल्कि भारत में विकासात्मक अक्षमताओं वाले बच्चों के लिए उच्च-गुणवत्ता वाले समर्थन की
आवश्यकता को भी वैश्विक मंच पर रेखांकित करता है। यह उनके काम की पहुंच और दीर्घकालिक प्रभाव का प्रमाण है। उनका मानना है कि सही हस्तक्षेप से प्रत्येक बच्चा अपनी क्षमता के अनुरूप प्रगति कर सकता है।
अमृता कृष्णमूर्ति
गणित की धुरंधर

मैथेमेटिशियन डॉ. राजुला श्रीवास्तव वर्तमान में यूनिवर्सिटी ऑफ विस्कॉन्सिनमैडिसन में असिस्टेंट प्रोफेसर हैं। डॉ. राजुला का शोध कार्य हार्मोनिक एनालिसिस और नंबर थ्योरी के अंतराफलक
पर केंद्रित है। हार्मोनिक एनालिसिस मूल रूप से ध्वनिक तरंगों के गणितीय अध्ययन या अधिक व्यापक तौर पर, फंक्शंस को मौलिक दोलनों में विघटित करने से संबंधित है। उन्हें हाल में ब्रेकथ्रू प्राइज फाउंडेशन द्वारा प्रतिष्ठित मैरीम मिर्जाखानी न्यू फ्रंटियर्स प्राइज 2025 से सम्मानित किया गया है। उन्होंने इस दौरान मिली पुरस्कार राशि का एक हिस्सा भारत में बाल शिक्षा का समर्थन करने वाले संगठनों को दान करने की इच्छा व्यक्त की है, जो उनकी सामाजिक प्रतिबद्धता को दर्शाता है। डॉ. राजुला ने भारत में नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस एजुकेशन एंड रिसर्च से अपनी मास्टर ऑफ साइंस पूरी की। उन्होंने अगस्त 2022 में यूनिवर्सिटी ऑफ विस्कॉन्सिन-मैडिसन
से गणित में डॉक्टरेट की उपाधि प्राप्त की।
डॉ. राजुला श्रीवास्तव
भारतीय उद्यमी और शोधकर्ता

झिलिका त्रिसाल आज भारत की उन युवा महिलाओं में शामिल हैं जिन्होंने कम उम्र में ही समाज और राजनीति के क्षेत्र में बड़ा प्रभाव डाला। यह ‘कॉग्निटी’ की सह-संस्थापक और सीईओ हैं। 2025 में उनके उद्यम कॉग्निटी ने पेरिस में वुमन एंटप्रेन्योर कार्यक्रम में शीर्ष 10 वैश्विक फाइनलिस्ट में जगह बनाई और जूरी पुरस्कार जीता। उनकी यात्रा आत्मविश्वास, साहस और बदलाव की चाह से भरी हुई है। झिलिका त्रिसाल का पालन-पोषण एक शिक्षित और जागरूक वातावरण में हुआ। बचपन से ही वे सामाजिक मुद्दों पर सवाल पूछने और अपनी राय रखने में आगे रहती थीं। उन्होंने राजनीति को सत्ता का साधन नहीं, बल्कि समाज की समस्याओं को समझने और हल करने का जरिया माना।
यही सोच आगे चलकर उनके सार्वजनिक जीवन की नींव बनी। अपने शोध और परिश्रम के माध्यम से इन्होंने देश की सर्वश्रेष्ठ महिलाओं की सूची में विशेष जगह बनाई।
झिलिका त्रिसाल
प्रेरणादायक खिलाड़ी

दीपिका टी.सी. आज भारतीय महिला ब्लाइंड क्रिकेट की सबसे प्रेरणादायक शख्सियतों में से एक हैं। वे सिर्फ एक खिलाड़ी नहीं, बल्कि एक ऐसी लीडर हैं जिन्होंने यह साबित कर दिया कि सीमाएं शरीर में नहीं, सोच में होती हैं। दीपिका ने नवंबर 2025 में कोलंबो में आयोजित पहले महिला टी-20 ब्लाइंड विश्व कप में टीम का नेतृत्व किया जहां भारत ने नेपाल को हराकर खिताब जीता।
दीपिका टी.सी.
खेलों की योद्धा

मीनाक्षी आज भारतीय महिला बॉक्सिंग का उभरता हुआ नाम हैं। वे उन खिलाड़ियों में शामिल हैं जिन्होंने सीमित संसाधनों, कड़े प्रशिक्षण और लगातार संघर्ष के बावजूद इंटरनेशनल लेवल तक का सफर तय किया। वर्ल्ड बॉक्सिंग चैंपियनशिप 2025 में उनकी मौजूदगी सिर्फ एक टूर्नामेंट का
हिस्सा नहीं, बल्कि यह साबित करना है कि भारत की बेटियां अब रिंग में भी आंख मिलाकर लड़ रही हैं।
मीनाक्षी हुड्डा
पाई अंतरराष्ट्रीय उपलब्धि

भाविता मंडावा आज ग्लोबल टेक इंडस्ट्री में एक जाना-माना नाम हैं। वे उन चुनिंदा भारतीय महिलाओं में से हैं जिन्होंने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और कंप्यूटर विजन जैसे एडवांस टेक्नोलॉजी क्षेत्रों में नेतृत्व किया। उन्होंने 2025 में अंतरराष्ट्रीय फैशन जगत में इतिहास रचा है। वह शनेल के प्रतिष्ठित ‘मेटियर्स डी आर्ट’ शो की ओपनिंग करने वाली पहली भारतीय मॉडल बनी हैं।
भाविता मंडावा
आत्मनिर्भर सफलता

राधा वेंबू का नाम उन चुनिंदा भारतीय महिलाओं में लिया जाता है जिन्होंने बिना किसी शोर-शराबे के टेक्नोलॉजी की दुनिया में बड़ा बदलाव किया। जोहो कॉर्पोरेशन की को-फाउंडर हैं और कंपनी की सफलता में उनकी भूमिका बेहद अहम रही है। कैनडेरे हुरून इंडिया महिला लीडर्स लिस्ट 2025
के अनुसार उन्होंने 55,300 करोड़ की कुल संपत्ति के साथ भारत की शीर्ष पहली पीढ़ी की महिला धन सृजनकर्ता बनीं।
राधा वेंबू
टेक्नोलॉजी की अग्रदूत

नेहा आज दुनिया की सबसे प्रभावशाली टेक उद्यमियों में गिनी जाती हैं। एक साधारण भारतीय पृष्ठभूमि से निकलकर उन्होंने सिलिकॉन वैली तक अपनी पहचान बनाई। वह उस सोच का नाम हैं जो कहती है कि अगर मेहनत और हिम्मत हो, तो कोई भी महिला ग्लोबल लेवल पर इतिहास रच
सकती है। 2025 में उन्हें भारत और अमेरिका की सबसे सफल और प्रभावशाली महिला जाना जा रहा है।
नेहा नरखेडे
युवा क्रिकेट स्टार

जब भी भारतीय महिला क्रिकेट की नई पीढ़ी की बात होती है, तो शेफाली का नाम सबसे पहले लिया जाता है। छोटी उम्र, बड़ी सोच और उनके बेखौफ अंदाज ने यह साबित कर दिया है कि अगर हौसले मजबूत हों, तो हालात कभी रास्ता नहीं रोक सकते। विश्व कप में अपने शानदार प्रदर्शन
के बाद उन्हें नवंबर 2025 के लिए आईसीसी महिला ह्रश्वलेयर ऑफ द मंथ का पुरस्कार दिया गया।
शेफाली वर्मा
क्रकेट की क्वीन

जब भारतीय महिला क्रिकेट की सबसे प्रेरक चेहरों की बात होती है, तो स्मृति मंधाना का नाम अपने आप सामने आ जाता है। शांत मुस्कान, सधी हुई बल्लेबाजी और आत्मविश्वास से भरी सोच-स्मृति सिर्फ एक बेहतरीन खिलाड़ी ही नहीं, बल्कि हर उस महिला की प्रेरणा हैं जो अपनी जिंदगी में कुछ नया करना चाहती है। वह महिला अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में 10,000 रन बनाने वाली सबसे तेज भारतीय महिला बल्लेबाज बन गई हैं।
स्मृति मंधाना
मैदान की चपलता

जेमिमा रोड्रिग्स का नाम आज आत्मविश्वास, आधुनिक सोच और निडर खेल का प्रतीक बन चुका है। मैदान पर उनकी फुर्ती, चेहरे पर मुस्कान और खेल के प्रति जुनून यह साफ दिखाता है कि जेमिमा क्रिकेट को सिर्फ खेल नहीं, बल्कि जिंदगी का जश्न मानती हैं। 2025 में आस्ट्रेलिया के खिलाफ
विश्व कप सेमीफाइनल में उनकी नाबाद 127 रनों की मैच जिताऊं पारी में भारत को फाइनल में पहुंचाया। यह महिला क्रिकेट इतिहास में सबसे सफल रन चेज थी।
जेमिमा रोड्रिग्स
उभरता सितारा

आज की युवा पीढ़ी में अगर कोई चेहरा तेजी से अपनी पहचान बना रहा है, तो वह है अनीत पड्डा। कम उम्र में ही अभिनय की दुनिया में कदम रखने वाली अनीत ने यह साबित कर दिया है कि अगर सपने सच्चे हों और मेहनत ईमानदार हो, तो मंजिल दूर नहीं रहती। सैयारा के बाद उन्हें एक बड़ी स्टार के रूप में देखा जाने लगा, साथ ही उन्हें ‘मिया बाय तनीष्क’ का नया ब्रांड चेहरा बनाया गया है।
अनीत पड्डा
सादगी में सशक्त अभिनय

मराठी सिनेमा और थिएटर की सशक्त अभिनेत्री गिरिजा ओक उन महिलाओं में शामिल हैं, जिन्होंने अपने हुनर, मेहनत और आत्मविश्वास के दम पर एक अलग पहचान बनाई है। एक वीडियो में उनकी सादगी और ब्लू साड़ी लुक ने उन्हें नेशनल क्रश बना दिया है। लल्लनटॉप के शो ‘घर जैसी बातें’ में सौरभ द्विवेदी के साथ आई थीं नेटफ्लिक्स की फिल्म इंस्पेक्टर जेंडे में मनोज वाजपेयी के साथ काम करना।
गिरिजा ओक
रफ्तार की रानी

भारतीय मोटरस्पोर्ट्स की दुनिया में कुछ नाम ऐसे होते हैं जो सिर्फ जीत दर्ज नहीं करते, बल्कि सोच बदलते हैं। वह मोटर साइकिल स्पोर्ट्स में विश्व खिताब जीतने वाली पहली भारतीय एथलीट हैं। शौक से शुरू हुई बाइक राइडिंग ने उन्हें दुनिया के सबसे मुश्किल रैली ट्रैक्स तक पहुंचा दिया और वहां भी भारत का झंडा लहराया। वर्ष 2025 उनके करियर में लिए मील का पत्थर साबित हुआ।
ऐश्वर्या पिस्से
नयी पीढ़ी की आवाज

भारत की स्क्वैश दुनिया में जब भी युवा प्रतिभा की बात होती है, तो एक नाम सबसे अलग चमकता है अनाहत सिंह। कम उम्र, बड़ा सपना और उससे भी बड़ा जज्बा। सिर्फ 17 साल की उम्र में अनाहत ने वह कर दिखाया है, जिसके लिए कई खिलाड़ियों को सालों लग जाते हैं। दिसंबर 2025 तक विश्व रैंकिंग में 28वें स्थान तक पहुंच चुकी अनाहत आज न सिर्फ भारत की सबसे उम्मीदभरी स्क्वैश खिलाड़ी हैं।
अनाहत
मंझी हुई कलाकार

कुछ चेहरे ऐसे होते हैं, जो कैमरे पर आते ही कहानी कहने लगते हैं। नितांशी गोयल उन्हीं में से एक हैं। मासूमियत, ठहराव और भीतर छुपी मजबूती इन तीनों का ऐसा संतुलन, जो उम्र से कहीं आगे की परिपक्वता दिखाता है। फिल्मफेयर 2025 में बेस्ट फीमेल डेब्यू दादा साहेब फाल्के अवॉर्ड 2025 में क्रिटिक्स बेस्ट एक्ट्रेस और कान्स फिल्म फेस्टिवल 2025 में डेब्यू शामिल है।
नितांशी गोयल
सिनेमा की नयी दृष्टि

जब भारतीय सिनेमा की दुनिया में नाम आता है, जो सिर्फ फिल्में बनाता है बल्कि अंतरराष्ट्रीय मंच पर देश का मान बढ़ाता है, तो वह नाम है पायल कपाड़िया। 2024 में उनकी पहली फीचर फिल्म ‘ऑल वी इमेजिन एस लाइट’ ने 77वें कान्स फिल्म फेस्टिवल में ग्रांड प्रिक्स जीता और 2025 में उन्हें गोल्डन ग्लोब अवार्ड्स के लिए बेस्ट डायरेक्टर की नोमिनेशन मिली।
पायल कपाड़िया
कॉरपोरेट नेतृत्व

Roshni Nadar Malhotra, Executive Director and CEO of HCL Enterprises, ranked No. 5 on the Hurun Global Rich List 2025 among the world’s richest women. Prior to this achievement, she was included in Forbes’ list of the world’s most powerful women for 2023, ranking No. 81 on this list. Roshni is Shiv Nadar’s only daughter.
Roshni Nadar Malhotra
Identifying self-confidence

Sherry Singh, born in Noida, Uttar Pradesh, brought glory to the country by winning the title of Mrs. Universe 2025. Held in Manila, Philippines, the beauty pageant attracted contestants from 120 countries worldwide. A member of the Gujjar community, Sherry had a childhood passion for modeling, which she pursued after marriage and achieved success.
Shari Singh
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